गुरुवार, 30 जनवरी 2014

नारी एक रूप एक हजार एक

nari      
                     नारी एक रूप एक हजार एक
      
        नारी एक है। उसके समाज में एक हजार एक रूप हैं। उसे समाज में स्त्री, वनिता, कलत्र, महिला, तिय, त्रिया, वामा, योगिता, वधु, अबला, ललना, कान्ता, रमणी, अगना, कामिनी, प्रमदा, सुन्दरी, गामिनी के रूप में जाना जाता है।         सुन्दरता का दूसरा नाम नारी है। नारी नाम ही सुन्दरता का प्रतीक है। उसे सुन्दरी, सुमुखी, प्रमदा, लालिका, सुनेत्रा, सुनयना, रमणी, कामिनी, ललना कहा जाता है।

        नारी का सर्वाेत्तम रूप माॅ का रूप है और माॅ के रूप में नारी सर्वत्र पूज्यनीय है। माॅ के रूप में उसे माता, अम्बा, माॅ, माई, मैया, जननी, जन्मदात्री, अम्बिका के रूप में जाना जाता है।

        बहिन के रूप में नारी का रूप त्याग और सेवा का है। इस रूप में उसे भगिनी, सहोदरा, स्वया, बहिन के रूप में जाना जाता है। एक ही गर्भ से पैदा होने के कारण वह सगर्भा, सजाता, सहोदरा, भगिन, सोदरा भी कहलाती है।

        पत्नि के रूप में नारी का त्याग, बलियन, दोस्त, हमदर्द, प्राणप्रिया, प्रेयसी के रूप में सामने आता है। साथ मरने, साथ जीने, सात जन्म तक साथ-साथ रहने की कसम के साथ जब नारी भगवान, खुदा, ईसा को गवाह मानकर पत्नि बनती है। तब उसका बीवी का रूप एक अलग जन्म नारी को देता है।

        पत्नि के रूप में उसका रूप भार्या, दारा, वामा, वल्लभा, सहगामिनी, जाया, सहचर्य, वधु, बहू, प्रिया, अंगना, कुलांगना, परिणीता, कलत्र, गृहणी, कुलजा, के रूप में समाज में जाना जाता है। विवाहित स्त्री को पति के जीवनकाल में सौभाग्यवती, सुहागिन, संधवा, समर्तका कहा जाता है।

        पत्नि बनने के बाद नारी माॅ बनती है उसके बच्चे होते हैं। वंश-वृ़क्ष बढ़ता है। पुत्र-पुत्रियाॅ पैदा होती हैं। पुत्रियों के रूप में नारी को पुत्री, तनया, बेटी, आत्मजा, सुता, अपत्या, नन्दिनी, कन्या, तनुजा के रूप में जाना जाता है।
        बालिका के रूप में वह कुमारी, गौरी, बेटी, किशोरी, कन्या और युवावस्था तरूणी, सुंदरी, श्यामा के रूप मंे जानी जाती है। बड़ी होकर नारी सखी, सहेली, अमली, सहरन्द्री, सहचरी, राजकी कहलाती है। नौकरी करने पर उसे परिचारिका, अनुचरी, किफरी कहा जाता है। 

        हमारे समाज में नारी को देवता का स्थान दिया गया है और उसे विद्या की देवी सरस्वती के रूप में गिरा, भारती, वीणा-पाणी, शाखा, वार्गश, ब्राम्हणी, आशा, वाकू, महाश्वेता, विद्यात्री, वागीश्वरी, ईश्वरी के रूप में जाना जाता है।

        धन की देवी और भगवान विष्णु की अध्र्दांगिनी के रूप में उसे  लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। धन की देवी लक्ष्मी को कमला के रूप में जाना जाता है। पार्वती के रूप में उमा, गिरिजा, भवानी, गौरी, अम्बिका, शिवा,      के रूप में भगवान शिव की पत्नि के रूप में जाना जाता है। 

        शक्ति की उपासना के रूप में नारी को दुर्गा के रूप में पूजते हैं उसे नवदुर्गा के रूप में जाना जाता है। शैलपुत्री, ब्रहचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, आदिशक्ति, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री के रूप में जाना जाता है।
        राम की पत्नि सीता के रूप में त्याग की मूर्ती, अग्नि परीक्षा देने वाली लवकुश की जनक सीता को वैदेही, जानकी, जनक नन्दनी, रामप्रिया, जनकतनया, भूमिजा के रूप में जाना जाता है।

        इन्द्राणी के रूप में उसे शचि, पौलोगी, इन्द्रावधु, इन्द्रा, महिन्द्री, पुलोनशा, मदवानी, द्रोपदी के रूप में उसे दु्रपद, सुता, कृष्णा, पांचाली, यशासैनी, सैरन्ध्री के रूप में जाना जाता है।

        नारी को देवताओं में स्थान देते हुए उसे गंगा के रूप मंे सुरसाई, जान्हवी, मंदाकिनी, अलकनंदा, देवनदी, विष्णुपई, सुरधुनी, देवप्रभा, धु्रवनंदा, भागीरसी, जियभगा के रूप में जानी जाती है।

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